अध्याय 88

अमेलिया जेम्स की चेतावनी से जैसे वहीं की वहीं जम गई, रोना तक भूल गई।

जेम्स के जाते ही वह उसे घूरती रह गई, उसका चेहरा स्याह पड़ चुका था।

जिस नज़रों में अभी-अभी शिकायत और आँसू छलक रहे थे, उनमें अब सिर्फ़ अथाह ज़हर भर गया था। वह मुझे ऐसे घूर रही थी मानो मुझे नोच डालना चाहती हो।

मैंने उसकी तरफ़ भौंहे...

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